2036 तक भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 230 मिलियन तक पहुँचने की संभावना
भारत तेज़ी से एक निर्णायक जनसांख्यिकीय परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है, जहाँ वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या सामाजिक ही नहीं, बल्किनीति और शासन से जुड़ा एक रणनीतिक विषयबन चुकी है। अनुमान है कि वर्ष2036 तक भारत में वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 230 मिलियनतथा2050 तक 320 मिलियनको पार कर जाएगी।
इसी पृष्ठभूमि मेंदक्ष फाउंडेशनने अपनी प्रमुख राष्ट्रीय पहल‘ख्याल अपने बुजुर्गों का(Buzoorgon Ka)’
के अंतर्गतमानव रचना विश्वविद्यालयके सहयोग से“बुजुर्ग होता भारत: उभरती चुनौतियाँ और समावेशी समाधान”विषय परवरिष्ठ नागरिकों के कल्याण पर राष्ट्रीय सम्मेलन – 2026का आयोजन किया।इस सम्मेलन का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण कोसहानुभूति आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ाकर अधिकार-आधारित, नीति-संचालित और आयु-मैत्रीपूर्ण शासन ढाँचेके केंद्र में लाना रहा।
उद्घाटन सत्र: रिश्तों, मूल्यों और शासन पर स्पष्ट संदेश
सम्मेलन केउद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथिडॉ. हनीफ कुरैशी, आईपीएस,अपर सचिव, भारी उद्योग मंत्रालय, भारत सरकाररहे।उन्होंने अपने संबोधन में कहाकि“वरिष्ठ नागरिक समाज पर बोझ नहीं, बल्किज्ञान, अनुभव और मूल्यों का अमूल्य भंडारहैं। आज आवश्यकता है कि हम रिश्तों को मज़बूत करें और वरिष्ठ नागरिकों को समाज में उनकी उचित भूमिका और सम्मान दें।”उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, गरिमा और भागीदारी सुनिश्चित करनानीति-निर्माताओं की प्राथमिक जिम्मेदारीहोनी चाहिए। उन्होंने इस विषय परदक्ष फाउंडेशन की पहल ‘ख़याल अपने बुज़ुर्गों का’को समय की आवश्यकता बताते हुए सराहना की और मानव रचना विश्वविद्यालय को इस प्रयास में साझेदार बनने के लिए बधाई दी।
वैलिडेटरी सेशन:राज्य की प्रतिबद्धता का स्पष्ट संकेत
सम्मेलन केवैलिडेटरी सेशन के मुख्य अतिथिश्री राजेश नागर,राज्य मंत्री, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, हरियाणा सरकाररहे।उन्होंने कहाकि“वरिष्ठ नागरिक हमारे समाज की दिशा तय करने वाले स्तंभ हैं। उनके कल्याण, सम्मान और सक्रिय भागीदारी को सुनिश्चित करना सरकार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है।”उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी नीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने तथा ज़मीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन पर बल दिया।
श्री संजय कुंडू, आईपीएस (सेवानिवृत्त)मुख्य सलाहकार (Governance & Public Safety), दक्ष फाउंडेशनने कहा:
‘ख्याल अपने बुज़ुर्गों का’ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और अधिकारों को सुनिश्चित करने की एकराष्ट्रीय सोचहै। यह सम्मेलन नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और समाज को एक मंच पर लाकर समाधान-केंद्रित विमर्श को आगे बढ़ाता है।”
फरीदाबाद को वरिष्ठ नागरिकों के लिए आदर्श शहर बनाने की प्रतिबद्धता
सम्मेलन मेंफरीदाबाद की महापौर श्रीमती परवीन बत्रा जोशीने भी विशेष रूप सेदक्ष फाउंडेशन की पहल ‘ख्याल अपने बुज़ुर्गों का’का समर्थन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा:“वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान और सुरक्षित, गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। दक्ष फाउंडेशन द्वारा इस विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाना अत्यंत सराहनीय है। मैं इस मुद्दे को न केवलस्थानीय स्तर, बल्किराज्य और राष्ट्रीय स्तरपर भी अपने मंच और सरकारी माध्यमों से उठाने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”
उन्होंने आगे कहा कि“फरीदाबाद को वरिष्ठ नागरिकों के लिएएक आदर्श और आयु-मैत्रीपूर्ण शहरबनाने के लिए जो भी नीतिगत, प्रशासनिक और सामाजिक कदम आवश्यक होंगे, उन्हें उठाने के लिए मैं हर संभव प्रयास करूँगी।”महापौर ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर बुनियादी ढाँचा, स्वास्थ्य सेवाओं, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सहभागिता को नगर प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात भी कही।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड: अनुभव और सेवा का सम्मान
सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों कोलाइफटाइम अचीवमेंट अवार्डसे सम्मानित किया गया:
• फ्लाइट लेफ्टिनेंट बलवान सिंह — खेल क्षेत्र
(मुख्य कोच, भारतीय कबड्डी टीम एवं जयपुर पिंक पैंथर्स)
• डॉ. अजयतहलान — स्वास्थ्य सेवाएँ
(पूर्व निदेशक, सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट, कसौली)
• श्री प्रमोद कुमार दत्ता — स्वास्थ्य सेवाएँ
(हेल्थ सेक्टर में दीर्घकालीन योगदान)
• डॉ. जे. सी. डागर — साहित्य (कृषि विज्ञान)
(समाज उत्थान और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान)
• डॉ. करण सिंह ढाका — शिक्षा
(पूर्व एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर; शिक्षा एवं रक्तदान सेवाओं में योगदान)
• श्री आर. एस. यादव — पर्यावरण संरक्षण
(सेवानिवृत्त खनन अधिकारी; पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका)
• श्री राजकुमार जैन — समाज सेवा
(150 से अधिक सामाजिक परियोजनाओं के सफल संचालन हेतु)
• श्री विनोद मलिक — कला एवं संस्कृति
(फाउंडर प्रेसिडेंट, फरीदाबाद लिटरेरी एंड कल्चरल सेंटर)
• श्री अशोक लवासा, आईएएस (सेवानिवृत्त) — प्रशासनिक सेवाएँ
(पूर्व वित्त सचिव,भारत सरकार एवं पूर्व चुनाव आयुक्त)
• श्री बी. दिवाकर — कानूनी सेवाएँ
(अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; न्याय एवं विधिक सहायता में योगदान)
सम्मेलन का सार
सम्मेलन मेंमानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन, पारिवारिक समर्थन, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और आयु-मैत्रीपूर्ण बुनियादी ढाँचेजैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई।अंतर-पीढ़ी संवादको विशेष महत्व दिया गया, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में रेखांकित किया गया।

