अगले महीने से सिगरेट की कीमतें 20% तक बढ़ सकती है। इसकी वजह है सरकार की और से लगाई गई एक्साइज ड्यूटी। इसे लेकर 31 दिसंबर को एक नोटिफिकेशन जारी किया है।
इसके मुताबिक 1 फरवरी 2026 से सिगरेट की प्रति 1,000 स्टिक्स पर 2,050 रुपए से लेकर 8,500 रुपए तक की ड्यूटी ली जाएगी। बाजार जानकारों का कहना है कि टैक्स के इस बोझ को कम करने के लिए कंपनियां सिगरेट की कीमतें बढ़ा सकती है।
सिगरेट पर अभी तक 28% GST के साथ ‘कंपनसेशन सेस’ लगता था। इससे कुल टैक्स 50% से ज्यादा हो जाता था। 3 सितंबर को किए गए बदलाव के बाद सिगरेट पर GST को बढ़ाकर 40% कर दिया गया, लेकिन सेस हटा दिया। नई दरें फरवरी 2026 से लागू होंगी।
अगर सरकार एक्साइज को लेकर कुछ नहीं करती तो सिगरेट सस्ती हो जाती। रेवेन्यू बचाने के लिए सरकार ने सेस की जगह अब परमानेंट एक्साइज ड्यूटी लगा दी है। नई दरें ₹2,050 से लेकर ₹8,500 प्रति 1,000 सिगरेट तय की गई हैं, जो पुराने टैक्स के मुकाबले काफी ज्यादा हैं।
इंटरनेशनल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के मुताबिक नए टैक्स स्ट्रक्चर से कुल टैक्स बोझ 20% से 30% तक बढ़ सकता है। ऐसे में कंपनियों को बढ़ोतरी का पूरा बोझ कंज्यूमर्स पर डालने के लिए सिगरेट की कीमतें कम से कम 15% बढ़ानी पड़ सकती हैं। हो सकता है इससे भी ज्यादा बढ़ानी पड़े।
टैक्स बढ़ने की खबर का असर शेयर बाजार पर भी दिखा। देश की सबसे बड़ी सिगरेट कंपनी ITC के शेयर आज 10% तक टूट गए। साल 2020 के बाद यह कंपनी के शेयरों में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है। वहीं, मार्सबोरो जैसे ब्रांड बेचने वाली कंपनी गॉडफ्रे फिलिप्स के शेयर भी 17.6% तक लुढ़क गए। निवेशकों को डर है कि कीमतें बढ़ने से सिगरेट की बिक्री घटेगी।
सरकार का यह कदम सरकारी खजाने को भरने की एक कोशिश माना जा रहा है। क्योंकि सितंबर में सरकार ने घरेलू खपत बढ़ाने के लिए कई उत्पादों पर GST में कटौती की थी।
साथ ही, अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% टैरिफ के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार अब ‘सिन गुड्स’ (तंबाकू और सिगरेट) पर टैक्स का बोझ बढ़ा रही है।
दुनिया में सबसे अधिक तंबाकू का सेवन करने वाले देशों की लिस्ट में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, भारत में 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के 25.3 करोड़ लोग स्मोकिंग करते हैं। इनमें लगभग 20 करोड़ पुरुष हैं और 5.3 करोड़ महिलाएं हैं।

