पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी में महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया। करीब 18 एकड़ जमीन पर तैयार हो रहा यह मंदिर उज्जैन के श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से ही जाना जाएगा। कार्यक्रम में साधु-संत भी शामिल हुए।
बीते 30 दिसंबर को कोलकाता के न्यू टाउन में ममता बनर्जी ने दुर्गा आंगन नाम के एक बड़े दुर्गा मंदिर की नींव रखी थी। इस दौरान उन्होंने भाषण में इस मंदिर का जिक्र करते हुए कहा था कि मंदिर के निर्माण के लिए जरूरी धनराशि जुटा ली गई है। मंदिर के निर्माण से सिलीगुड़ी में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
हालांकि, इस कार्यक्रम को लेकर उत्तर बंगाल की राजनीति गरमा गई है। गुरुवार को दार्जिलिंग के सांसद और भाजपा के केंद्रीय प्रवक्ता राजू बिष्ट ने सिलीगुड़ी में पत्रकार वार्ता कर कहा कि मंदिर का निर्माण ट्रस्टी बोर्ड के माध्यम से होने की बात कही जा रही है, लेकिन पूरा आयोजन सरकारी बैनर तले हो रहा है।
बीते 30 दिसंबर को कोलकाता के न्यू टाउन में ममता बनर्जी ने दुर्गा आंगन नाम के एक बड़े दुर्गा मंदिर और सांस्कृतिक परिसर की नींव रखी थी। यह देश का सबसे बड़ा दुर्गा मंदिर परिसर होगा। जो 15 एकड़ में बनकर तैयार होगा। इस मंदिर में रोजाना 1 लाख श्रद्धालु दर्शन कर पाएंगे।
मंदिर परिसर की नींव रखने के बाद ममता ने जनता को संबोधित किया। अपने ऊपर लगे तुष्टीकरण के आरोपों का जवाब दिया। ममता ने कहा- कई लोग कहते हैं कि मैं तुष्टीकरण कर रही हूं लेकिन मैं सेक्युलर हूं और सभी धर्मों में विश्वास करती हूं। मुझे बंगाल से प्यार है, मुझे भारत से प्यार है। यही हमारी विचारधारा है।
पश्चिम बंगाल के पूर्वी मेदिनीपुर के दीघा में एक जगन्नाथ मंदिर भी बनवा चुकी हैं। ममता ने 29 अप्रैल, 2025 को इस मंदिर का उद्घाटन किया था। इस मंदिर में देवताओं की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी यज्ञ-हवन और पूजा के लिए मंगलवार को ही दीघा पहुंच गई थीं।
उद्घाटन के बाद लेजर शो और डायनेमिक लाइट शो रखा गया। मंदिर के उद्घाटन के लिए पहले दीघा की सड़कों को रोशनी से सजाया गया। दीवारों को नीले और सफेद रंग से रंगा गया। ओडिशा के पुरी में बने 12वीं सदी के मंदिर की तर्ज पर बने इस जगन्नाथ मंदिर का निर्माण करीब 20 एकड़ में किया गया है। इसके लिए राजस्थान के बंसी पहाड़पुर से लाल बलुआ पत्थर मंगाए गए थे।

