गणतंत्र दिवस समारोह में केंद्र सरकार सालों से चले आ रहे VIP कल्चर को खत्म करने जा रही है। परेड देखने के लिए आए मेहमानों की कुर्सियों पर अब VVIP, VIP और डिग्निटी नहीं लिखा होगा। इसकी जगह नदियों के नामों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए गैलरी का नाम संगीत वाद्ययंत्रों के नाम पर रखा है।
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से आम आदमी और वीआईपी के बीच अंतर कम होगा। भारतीय संस्कृति, विरासत और समानता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही हर नागरिक खुद को बराबर महसूस कर सकेगा।
यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट, उर्सुला वॉन डेर लेयेन 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य मेहमान के तौर पर शामिल होंगे।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ (EU) 2004 से रणनीतिक साझेदार हैं। पीएम मोदी ने दोनों नेताओं को समारोह में शामिल होने का न्योता दिया है। ये नेता 27 जनवरी को 16वें भारत-EU शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता भी करेंगे।
1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो फर्स्ट चीफ गेस्ट बने थे। अब तक यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस के लीडर्स को सबसे ज्यादा 5-5 बार चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया है।
रिपब्लिक डे परेड के लिए चीफ गेस्ट का चुनाव भारत की डिप्लोमैटिक प्रायोरिटीज और बिजनेस रिलेशन के आधार पर तय किया जाता है। मेहमान का नाम तय करते समय यह देखा जाता है कि किस देश के साथ आने वाले समय में ट्रेड, डिफेंस और साइंस के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जा सकता है।
संविधान अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर सिक्का और डाक टिकट भी जारी किया गया। संस्कृत और मैथिली में संविधान की प्रतियां भी जारी की गईं। 2 किताबों ‘भारतीय संविधान का निर्माण: एक झलक’ और ‘भारतीय संविधान का निर्माण और इसकी गौरवशाली यात्रा’ का विमोचन किया गया।

