कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर चल रही खींचतान के बीच शनिवार सुबह 10:15 बजे CM सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने साथ में ब्रेकफास्ट किया।
एक घंटे बाद दोनों नेताओं ने जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सिद्धारमैया ने कहा- हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है और न ही भविष्य में होगा। हम साथ में मिलकर काम करेंगे।
वहीं डीके शिवकुमार ने कहा- हाईकमान जो भी कहेगा, हम उसका पालन करेंगे और कोई ग्रुप नहीं है। मैं मुख्यमंत्री के साथ हूं, कर्नाटक के विकास को प्राथमिकता देंगे।
दरअसल दोनों नेताओं की ये मुलाकात हाईकमान के आदेश के बाद हुई है। पिछले 15 दिनों से दोनों गुटों के कार्यकर्ता अपने-अपने नेता को सीएम पद पर देखना चाह रहे है।
2023 में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री पद के लिए 2.5-2.5 साल की डील हुई थी, लेकिन सिद्धारमैया समर्थक इसे नकारते आए हैं। वहीं पार्टी की तरफ से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।
CM ने कहा- BJP और JDS को झूठे आरोप लगाने की आदत है। BJP और JDS ने बयान दिया है कि वे नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाएंगे। उनके पास सिर्फ 60 सीटें हैं। वे हमारी संख्या का मुकाबला नहीं कर सकते। हमारे पास 140 हैं। यह एक बेकार की कोशिश है। हम उनके झूठे आरोपों का सामना करेंगे।
शिवकुमार बोले- आप सभी के सपोर्ट से हम कांग्रेस सरकार लाए हैं और हम अपने वादे के मुताबिक काम कर रहे हैं। राज्य के लोग अपना पूरा सपोर्ट दे रहे हैं। हमें उनकी इच्छाएं पूरी करनी हैं। हम उस दिशा में काम कर रहे हैं। CM ने जो भी कहा, मैं CM के साथ हूं।
जहां तक लीडरशिप के मामले की बात है, हम अपनी पार्टी हाईकमान को मानते हैं। वे जो भी कहते हैं, वह हमारा फैसला है। हम पार्टी के वफादार सिपाही रहे हैं। हम जानते हैं कि हमारे देश में पार्टी मुश्किल दौर से गुजर रही है। लेकिन हमें भरोसा है कि कर्नाटक एक बड़ी भूमिका निभाएगा, हम 2028 में सरकार दोहराएंगे।
कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। शिवकुमार के समर्थक विधायकों का कहना है कि 2023 में जब कांग्रेस की सरकार बनी थी, तब मुख्यमंत्री पद के लिए 2.5-2.5 साल की डील हुई थी, लेकिन सिद्धारमैया समर्थक इसे नकारते आए हैं।
कर्नाटक में कांग्रेस सरकार का 20 नवंबर को 2.5 साल का कार्यकाल पूरा हुआ है। कुछ विधायक जो डिप्टी CM डीके शिवकुमार के समर्थक माने जाते हैं, वे दिल्ली जाकर खड़गे से मिले थे।
सूत्रों के मुताबिक सिद्धारमैया कैबिनेट फेरबदल के पक्ष में हैं। जबकि शिवकुमार चाहते हैं कि पार्टी पहले नेतृत्व परिवर्तन पर फैसला करे। पार्टी के अंदरूनी हलकों में यह भी माना जा रहा है कि यदि हाई कमान कैबिनेट विस्तार को मंजूरी देता है, तो इससे सिद्धारमैया के पूरे कार्यकाल (5 साल) तक टिके रहने का संकेत मिल सकता है, जो शिवकुमार की सीएम बनने की संभावनाओं को कम कर देगा।


