महाराष्ट्र की अंबरनाथ और अकोट नगर पालिका चुनाव के रिजल्ट के बाद बुधवार को अप्रत्याशित गठबंधन देखने को मिले। अंबरनाथ नगर पालिका में भाजपा ने कांग्रेस-एनसीपी से हाथ मिलाया।
वहीं, अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में पार्टी ने असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM के साथ गठबंधन किया। हालांकि ये गठबंधन कुछ ही घंटों में टूट गया।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को इन गठबंधन को खारिज कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। कांग्रेस ने भी अंबरनाथ के 12 पार्षदों को पार्टी से सस्पेंड कर दिया।
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। बहुमत के लिए 31 उम्मीदवार चाहिए थे। चुनाव के बाद बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला। चुनाव परिणाम आने के बाद शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन इसके बावजूद वह सत्ता से बाहर रह गई।
दरअसल, भाजपा ने चुनाव के बाद कांग्रेस और अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के साथ मिलकर ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम से गठबंधन बना लिया। इस गठबंधन के जरिए नगर परिषद में बहुमत जुटाया गया और परिषद का नेतृत्व अपने हाथ में ले लिया गया। इसके चलते भाजपा की सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर कर दिया गया।
इस गठबंधन के समर्थन से भाजपा नेता तेजश्री करंजुले को अंबरनाथ नगर परिषद की अध्यक्ष (मेयर) चुना गया। यह गठजोड़ इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस का विरोध करती रही है, लेकिन अंबरनाथ में सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया।
भाजपा पार्षद अभिजीत करंजुले पाटील ने कहा कि यह गठबंधन अंबरनाथ को भ्रष्टाचार और डर से मुक्त करने के लिए बनाया गया। वहीं, शिवसेना के विधायक डॉ. बालाजी किनिकर ने इसे साझेदारी धर्म का विश्वासघात करार दिया और कहा कि भाजपा का राष्ट्रीय नारा ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ स्थानीय स्तर पर धरातल पर नहीं दिखा।
महाराष्ट्र में बीजेपी, अजित पवार की एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना महायुति सरकार चला रही है। बावजूद इसके स्थानीय चुनाव में सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी ने कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन किया, जिसे सीएम देवेंद्र फडणवीस ने खारिज कर दिया है।


