मौसम विभाग (IMD) ने मंगलवार को कहा कि देश में जून के महीने में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है, जो LPA (लॉन्ग पीरियड एवरेज) का 108 प्रतिशत हो सकती है।
मौसम विभाग के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि मध्य और दक्षिण भारत में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की उम्मीद है। उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य, जबकि पूर्वोत्तर में सामान्य से कम बारिश हो सकती है।
अर्थ साइंस मिनिस्ट्री के सचिव एम रविचंद्रन ने कहा- मौजूदा सीजन में मानसून के कोर जोन में सामान्य से ज्यादा बारिश (लॉन्ग पीरियड एवरेज का 106% से अधिक) होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी आज से भारत फोरकास्ट सिस्टम को यूज किया जाएगा।
मानसून के कोर जोन में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, ओडिशा और आस-पास के क्षेत्र शामिल हैं। इनमें अधिकांश बारिश साउथ वेस्ट मानसून के दौरान होती है और यह रीजन खेती के लिए मानसूनी बारिश पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है।
क्या होता है लॉन्ग पीरियड एवरेज
इसका मतलब है कि मौसम विभाग ने 1971-2020 की अवधि के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) को 87 सेमी (870 मिमी) निर्धारित किया है। अगर किसी साल की बारिश 87 सेमी से ज्यादा होती है, तो उसे सामान्य से अधिक माना जाता है। अगर कम हो तो कमजोर मानसून माना जाता है।
जानिए क्या है भारत फोरकास्ट सिस्टम
भारत सरकार ने आज एडवांस भारत फोरकास्ट सिस्टम (BFS) लॉन्च किया। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह इसे देश को सौंपा। यह सिस्टम आपदा प्रबंधन, खेती, जल प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा में पंचायत स्तर तक मदद करेगा।
BFS सिस्टम मौसम के बारे में पहले से कहीं ज्यादा सटीक और छोटी से छोटी जानकारी देगा। पुणे के इंडियन इंडियन इंस्टीट्यूट और ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजिकल (IITM) ने इसे तैयार किया है।
BFS सिस्टम 6 KM के रेजोल्यूशन पर मौसम का अनुमान लगाएगा, जो दुनिया में सबसे बेहतर है। इससे छोटी से छोटी मौसम संबंधी घटनाओं जैसे बारिश, तूफान का पहले से ज्यादा सटीक पता लगाया जा सकेगा। मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस के सेक्रेटरी एम रविचंद्रन ने बताया कि अब मौसम का पूर्वानुमान पहले से ज्यादा स्थानीय और सटीक होगा।


