– आनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने वाले देश के शीर्ष दस शिक्षण संस्थानों में जे.सी. बोस विश्वविद्यालय
– स्वयं-एनपीटीईएल पोर्टल पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की भागीदारी सबसे ज्यादा
फरीदाबाद, 8 फरवरी – जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षण पर राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीटीईएल) में लगातार बेहतर प्रदर्शन जारी रखा है। विश्वविद्यालय को एनपीटीईएल के लोकल चैप्टर में भागीदार देश के चार हजार से ज्यादा शिक्षण संस्थानों में 9वां स्थान प्राप्त हुआ है। यह छठी बार है जब विश्वविद्यालय ने एनपीटीईएल में भागीदारी की और विश्वविद्यालय को स्वयं-एनपीटीईएल लोकल चैप्टर्स में ‘एएए’ ग्रेड के साथ मूल्यांकन किया गया।
इस प्रकार, स्वयं-एनपीटीईएल लोकल चैप्टर (जनवरी-दिसम्बर) की जारी की गई ताजा रेटिंग में जे.सी. बोस विश्वविद्यालय देश के शीर्ष 100 शिक्षण संस्थानों में जगह बनाने वाला हरियाणा का एकमात्र विश्वविद्यालय है। यह रेटिंग आनलाइन शिक्षण के क्षेत्र विश्वविद्यालय द्वारा की भागीदारी को दर्शाती है।
कुलपति श्री राज नेहरू तथा डाॅ. एस.के. गर्ग ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों, विशेष रूप से डिजिटल प्रकोष्ठ, मूक्स संयोजकों और आनलाइन पाठ्यक्रम में हिस्सा लेने वाले विद्यार्थियों को सफलता पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने विभिन्न राष्ट्रीय मंचों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है जो शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अपनाए गए गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है।
विश्वविद्यालय में डिजिटल मामलों की निदेशक डॉ. नीलम दूहन, जोकि विश्वविद्यालय में एनपीटीईएल कार्यक्रम कार्यान्वयन के लिए एकल संपर्क (एसपीओसी) हैं, ने बताया कि एनपीटीईएल ने जनवरी से दिसम्बर, 2021 तक भागीदारी करने वाले शीर्ष क्रम के 100 संस्थानों की सूची जारी की है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने विभिन्न ऑनलाइन पाठ्यक्रमों में नामांकन, उत्तीर्ण प्रतिशत और शीर्ष स्थान प्राप्त करने जैसे चुनिंदा मापदंडों के आधार पर 9वां स्थान प्राप्त किया है।
प्रौद्योगिकी संवर्धित शिक्षण में जे.सी. बोस विश्वविद्यालय हरियाणा में अव्वल
इस न्यूज़ पोर्टल अतुल्यलोकतंत्र न्यूज़ .कॉम का आरम्भ 2015 में हुआ था। इसके मुख्य संपादक पत्रकार दीपक शर्मा हैं ,उन्होंने अपने समाचार पत्र अतुल्यलोकतंत्र को भी 2016 फ़रवरी में आरम्भ किया था। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस नाम को मान्यता जनवरी 2016 में ही मिल गई थी ।
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