फरीदाबाद। सूरजकुंड में पिछले कई दिनों से चल रहे अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले में शनिवार को वीकेंड के अवसर पर पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। देश-विदेश से आए आगंतुकों ने जमकर खरीदारी की और मेले की जीवंतता को और बढ़ा दिया। मेले में उपलब्ध सुविधाओं को लेकर आगंतुक सरकार व प्रशासन की खुले दिल से सराहना करते नजर आए। बीके अस्पताल फरीदाबाद से मेला देखने आई नर्सिंग ऑफिसर रीनू ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे पिछले कई वर्षों से मेला देखने आ रही हूं। इस बार आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 की गलियों में घूमते हुए उनका मन भारतीय संस्कृति के रंगों में रंग गया। चारों ओर गूंजता लोकसंगीत, हस्तशिल्प से सजी दुकानों की कतारें और मिट्टी की सौंधी खुशबू पूरे वातावरण को जीवंत बना रही थी। नर्सिंग आफिसर रीनू बताती हैं कि सजी हुई दुकानों में से उनकी नजर आकर्षक खादी की कुर्ती पर पड़ी।
हल्का क्रीम रंग आंखों को सुकून देता था। कपड़े की बनावट प्राकृतिक थी—न अधिक चमकदार, न भडक़ीली—बल्कि सादगी में छिपी सुंदरता का प्रतीक। गले पर की गई रंगीन धागों की बारीक कढ़ाई ने कुर्ती को विशेष आकर्षण दिया। कुर्ती को हाथ में लेते ही खादी की कोमल खुरदरी बनावट ने भारतीय कारीगरों की मेहनत और हुनर का एहसास करा दिया। उन्होंने टाइगर आई पत्थर का नेकलेस भी खरीद किया है। जब वे खादी की कुर्ती के साथ यह नेकलेस पहनती हैं, तो उनका पूरा व्यक्तित्व भारतीय परंपरा और आधुनिक सादगी का सुंदर संगम बन जाता है। यह केवल वस्त्र और आभूषण नहीं, बल्कि भारतीय कला और संस्कृति की जीवंत झलक हैं।
वहीं बहादुरगढ़ से आई शीतल ने मेले को हस्तशिल्प कला का अनूठा संगम बताया। उन्होंने कहा कि यहां देश-विदेश की कला एवं संस्कृति का सुंदर मेल देखने को मिला, जो इसे अपने आप में यादगार बनाता है। नजफगढ़ से मेला घूमने आई मीतू ने कहा कि वर्ष में एक बार लगने वाले इस मेले की यादें पूरे साल मन में बनी रहती हैं। उनके लिए मेले से जरूरी घरेलू सामान की खरीदारी प्राथमिकता रहती है। मीतू के अनुसार इस बार मेले में उपलब्ध सामान पिछले वर्ष की तुलना में कुछ अधिक किफायती है, जिससे खरीदारी का आनंद और बढ़ गया है। कुल मिलाकर, वीकेंड पर सूरजकुंड आत्मनिर्भर शिल्प मेला खरीदारी, संस्कृति और कारीगरों की कला के अद्भुत संगम के रूप में पर्यटकों के लिए यादगार बनता नजर आया।


