logo logo
  • नेशनल न्यूज़
  • राज्य खबरें
    • हरियाणा
      • Faridabad
    • चंडीगढ़
    • Delhi
  • एजुकेशन
  • मनोरंजन
  • हेल्थ न्यूज़
  • टेक्नोलॉजी
  • Video News
    • Live – YouTube
  • More News
    • Online
      • विचार
      • E Paper
Reading: काप-30 से भी नहीं हुआ जीवाश्म ईंधन का हल: ज्ञानेन्द्र रावत
Share
Notification
Atulya LoktantraAtulya Loktantra
Font ResizerAa
Search
  • नेशनल न्यूज़
  • राज्य खबरें
    • हरियाणा
    • चंडीगढ़
    • Delhi
  • एजुकेशन
  • मनोरंजन
  • हेल्थ न्यूज़
  • टेक्नोलॉजी
  • Video News
    • Live – YouTube
  • More News
    • Online
Follow US
  • About
  • Contact
  • Advertise With Us
  • Privacy policy
  • Disclaimer
  • Fact-Checking Policy
Home » काप-30 से भी नहीं हुआ जीवाश्म ईंधन का हल: ज्ञानेन्द्र रावत
विचार

काप-30 से भी नहीं हुआ जीवाश्म ईंधन का हल: ज्ञानेन्द्र रावत

Deepak Sharma
Last updated: 1 December, 2025
By Deepak Sharma
63 Views
Share
10 Min Read
Even CAP-30 did not solve the fossil fuel problem: Gyanendra Rawat
Even CAP-30 did not solve the fossil fuel problem: Gyanendra Rawat
SHARE

विगत दिनों ब्राजील के बेलेम में हुआ संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन काप-30 सम्पन्न हो गया। सम्मेलन के अंत में वही पुराना जुमला दोहराया गया जिसकी कि पहले से ही उम्मीद थी, कि आने वाले समय में सभी देश मिलकर काम करेंगे जो संभव नहीं दिखता। बीते दशकों का इतिहास इसका प्रमाण है। सम्मेलन का हासिल भी यह संदेश दे रहा है कि यह उतना आसान नहीं है। खासकर सम्मेलन के आखिरी दिन जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने को लेकर जिस तरह की खींचतान हुयी, वह दुनिया को आश्वस्त करने की दिशा में विश्वसनीय नहीं दिखाई दी। यही नहीं सम्मेलन में आपाधापी और अनिश्चितता का आलम यह रहा कि जीवाश्म ईंधन से जुड़ी वैश्विक योजना का उल्लेख पहले ड्राफ्ट में किया गया था, उसको आखिर में संशोधित ड्राफ्ट से हटा ही दिया गया। इससे यह साफ हो गया है कि जीवाश्म ईंधन का मुद्दा इसके बाद भी यानी आने वाले दौर में भी अनसुलझा ही रहेगा। जैसी कि 11 नवम्बर को सम्मेलन की शुरुआत में यह उम्मीद बंधी थी कि सम्मेलन में भाग लेने वाले दुनियाभर के देश ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ किसी ठोस नतीजे पर पहुंच जायेंगे। लेकिन सम्मेलन की गति को देखते हुए और दुनिया के देशों के रवैय्ये से आखिर में सम्मेलन जिस मुकाम पर पहुंचा, उसने साबित कर दिया कि वैश्विक तापमान बढ़ोतरी के खिलाफ सम्मेलन कुछ भी करने में नाकाम रहा और उसकी गति ‘ नौ दिन चले अढाई कोस’ वाली ही रही। इसके बावजूद सम्मेलन में हुयी जलवायु वार्ता को कई मायनों में अभूतपूर्व कहा जा रहा है। इसका अहम कारण यह रहा कि सम्मेलन में मौजूद दुनियाभर के 194 देशों ने तमाम तरह के मतभेदों-तनावों और अमरीका की गैर मौजूदगी के बीच एक ऐसे पैकेज पर सहमति दर्ज की ।इसकी प्रशंसा की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि जलवायु मुद्दे पर इसे बेलेम पॉलिटिकल पैकेज की संज्ञा दी जा रही है।जाहिर है और उम्मीद भी की जा रही है कि यह पैकेज वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने की राह आसान करेगा। दरअसल दुनियाभर के 194 देशों की जलवायु मुद्दे पर एकमत से सहमति यह जाहिर करती है कि अब जलवायु मुद्दा वैश्विक नेतृत्व का सवाल नहीं रह गया है और न ही नैतिक मुद्दा रहा है बल्कि अब यह मुद्दा आर्थिक सुरक्षा और विकास का रास्ता भी बन चुका है। यही वह अहम कारण रहा जिसके चलते इस सम्मेलन में अप्रत्याशित रूप में एक नये तरीके का आपसी सहयोगात्मक रवैय्या कहें या फिर बहुपक्षीय वाद कहें, उभरा जिसके कारण सम्मेलन में वह चाहे बड़े देश हों या फिर छोटे देश हों या फिर विकासशील देश एक मंच पर बराबरी के साथ एक साथ बैठे नजर आये और जलवायु जैसे एक मुद्दे पर ही सही, एकमत दिखाई दिये।

इसमें दो राय नहीं है और यह कटु सत्य भी है कि आज दुनिया भीषण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इसके बावजूद दुनिया के अधिकाधिक देश वैश्विक तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस के नीचे रखने और 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य को लेकर उदासीन बने हुए हैं। यह विडम्बना नहीं तो और क्या है। दिनोंदिन तेजी से बढ़ता कार्बन उत्सर्जन और तापमान मानव अस्तित्व के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसके पीछे विकसित देशों का कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की अपनी प्रतिबध्दता पर खरा नहीं उतरना रहा है। यह हमारे पर्यावरण, वन और जलवायु के लिए जहां भीषण खतरा है, वहीं मानव अस्तित्व की रक्षा के लिए भीषण चुनौती बनकर सामने आ खड़ी है। जबकि होना यह चाहिए था कि विकसित देश निर्धारित अवधि से पहले ‘नेट जीरो’ लक्ष्य तक अपनी पहुंच बनाने में कामयाब हो जाते। चूंकि विकसित देश ज्यादा कार्बन उत्सर्जन के दोषी हैं, इसलिए उनको यह अतिरिक्त जिम्मेदारी भी वहन करनी चाहिए थी।

सबसे बड़ी बात यह कि काप-30 सम्मेलन यह जानते-समझते हुए कि अब हमारे पास समय बहुत ही कम बचा है, और पेरिस समझौते को अमल में लाना निहायत जरूरी है,,मुख्यत: दुनियाभर के देश क्लाइमेट एक्शन को किस तरह आगे बढ़ाते हैं, तकनीक व राहत राशि कहें या धन उन देशों जो इससे सर्वाधिक प्रभावित हैं के लोगों जिनको इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, के पास कैसे पहुंचाया जा सकता है और जलवायु कार्यवाई किस तरह समग्रता में की जा सकती है, इन तीन सवालों के बीच ही घूमता रहा। सम्मेलन का यह विमर्श भी सराहनीय कहा जा सकता है कि मौजूद देशों ने इसे स्वीकारा कि विकासशील देशों के हितों को अहमियत देना समय की मांग है। इसका अहम कारण यह कि जलवायु संकट में उनका योगदान सबसे कम या यूं कहें कि नगण्य है। इसके बावजूद वे इसका सबसे ज्यादा खामियाजा भुगत रहे हैं। जहांतक जलवायु परिवर्तन से प्रभावित गरीब देशों के लिए फंड के आवंटन का सवाल है, ताकि वे मौसम के कहर से निबटने में कामयाब हो सकें। उनके लिए सम्मेलन में सर्वसम्मत लिया गया निर्णय सराहनीय कदम रहा कि उनको तीन गुणा फंड दिया जायेगा। खासियत यह कि मौजूद देशों ने अमीर देशों से अपील की कि वे साल 2035 तक विकसित देशों को गर्म होती दुनिया के हिसाब से ढलने के लिए दिये जाने वाली राशि को कम से कम तीन गुणा कर दें। क्योंकि विकासशील देशों को समुद्र के बढ़ते जलस्तर और भोषण गर्मी, सूखा, बाढ और तूफान से निपटने की खातिर तुरंत फंड की जरूरत है। इस समझौते के लिए अधिकतर देशों ने जलवायु परिवर्तन के असर से निबटने में एकता दिखाने की कोशिश की लेकिन अमीर और विकासशील देशों के बीच, इसके साथ तेल, गैस और कोयले पर अलग अलग सोच रखने वाली सरकारों के बीच उभरे मतभेद उनके पुराने सोच का सबूत तो है हीं, यह भी कि इन मुद्दों पर वह आज भी अपने रवैय्ये से टस से मस नहीं हुये हैं। जंगलों की सुरक्षा का मुद्दा भी आम सहमति न हो पाने के चलते लटका ही रह गया।

जहांतक भारत का सवाल है, भारत का यह दृढ़ मत रहा है कि विकसित देशों को तय अवधि से पहले ‘नेट जीरो’ लक्ष्य तक पहुंचना चाहिए। विकसित देशों ने ज्यादा कार्बन उत्सर्जन किया है, तो अतिरिक्त जिम्मेदारी भी उन्हें ही उठानी चाहिए। उनको भारत से सबक लेना चाहिए जो अपने विकास कार्यक्रम और पर्यावरण संरक्षण पहल को साथ साथ आगे बढ़ा रहा है। इसी का परिणाम है कि भारत 2070 की समय सीमा से पहले ही नेट जीरो का लक्ष्य हासिल कर लेगा। भारत ने सम्मेलन को आश्वस्त किया कि वह संशोधित एनडीसी साल 2035 तक समय पर घोषित कर देगा।

जीवाश्म ईंधन का मसला छोड़ दें जबकि हकीकत यह है कि जलवायु संकट बढाने में जीवाश्म ईंधन कोयला, गैस और तेल अभी भी सबसे बड़े खलनायक हैं और जैसीकि आशा थी कि सम्मेलन में जीवाश्म ईंधन की मजबूत लाबी जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के रोडमैप जारी होने में अडंगा लगायेगी और वह अंतत अपने मकसद में कामयाब भी रही । नतीजतन जीवाश्म ईंधन का मुद्दा लटका ही रह गया। इसके बावजूद कुलमिलाकर सम्मेलन का निष्कर्ष काफी प्रेरणादायक है । उसमें ग्लोबल इम्पलीमेंटेशन एक्सिलरेटर की शुरुआत अहम कदम है जिसके तहत अगले दो साल में देशों की जलवायु योजनाओं में और 1.5 सी लक्ष्य के बीच के अंतर को पाटने के लिए एक फास्ट ट्रैक शुरू किया जाना है और दूसरा सराहनीय प्रयास जस्ट ट्रांजिशन मैकेनिज्म से जुड़ा है। बेलेम से यह साफ संकेत दिया गया कि दुनिया की ऊर्जा की कहानी अब पहले जैसी नहीं रही, वह अब बदल रही है। दक्षिण कोरिया का यह ऐलान दुनिया के लिए एक अच्छा संकेत है कि वह कोयले से बहुत जल्दी बाहर होगा। जबकि भारत की जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता बढ़ना चिंता का विषय है जिसकी अहम वजह रिकॉर्ड गर्मी से बिजली की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी है। फिर कार्बन डाई आक्साइड उत्सर्जन में डेड फीसदी की बढोतरी जहां एक और चिंता का सबब है, वहीं समय से पहले आये मानसून और ऊर्जा के तेज विस्तार ने कोयले की खपत को सीमित रखने में अहम भूमिका निबाही है। यह संतोष का विषय है। कुल मिलाकर बेलेम से निकली हवा ने यह साफ कर दिया है कि दुनिया भले पहले से कहीं ज्यादा विभाजित है लेकिन जलवायु कार्रवाई पर बनी सहमति यह संकेत देती है कि साझा संकट साझा समाधान चाहता है। अब भी बहुत कुछ हो सकता है।

Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
ByDeepak Sharma
Follow:
इस न्यूज़ पोर्टल अतुल्यलोकतंत्र न्यूज़ .कॉम का आरम्भ 2015 में हुआ था। इसके मुख्य संपादक पत्रकार दीपक शर्मा हैं ,उन्होंने अपने समाचार पत्र अतुल्यलोकतंत्र को भी 2016 फ़रवरी में आरम्भ किया था। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से इस नाम को मान्यता जनवरी 2016 में ही मिल गई थी ।
Previous Article Union Environment Minister Shri Bhupendra Yadav presenting India's point of view at the conference सम्मेलन में भारत का पक्ष रखते केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव
Next Article Congress MP Renuka Chowdhary arrives at Parliament premises with a dog संसद परिसर में कुत्ता लेकर पहुंचीं कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी
vidyasagar international school
vidyasagar international school

Haryana News (हरियाणा न्यूज़)

Rehearsals are underway for the 77th Republic Day celebrations, and the Health Minister will pay tribute to the martyrs at the War Memorial.
77वें गणतंत्र दिवस समारोह को लेकर रिहर्सल जारी, स्वास्थ्य मंत्री वॉर मेमोरियल पर देंगी शहीदों को श्रद्धांजलि
Faridabad
The Modi government is undermining the rights of laborers by making changes to the MNREGA law: Poonam Chauhan
मनरेगा कानून में बदलाव कर मजदूरों के हकों पर कुठाराघात कर रही है मोदी सरकार : पूनम चौहान
Faridabad
A pre-budget meeting regarding the Haryana budget for 2026-27 was held in Faridabad.
हरियाणा बजट 2026-27 को लेकर फरीदाबाद में प्री-बजट बैठक हुआ संपन्न
Faridabad
A man has been arrested for murdering his brother-in-law on suspicion of having an illicit affair with his wife.
पत्नी से अवैध संबंध के शक में साले का मर्डर करने वाला जीजा गिरफ्तार
Faridabad
Chief Minister Nayab Singh Saini praised efforts to promote startups and entrepreneurship, and called for setting ambitious goals.
स्टार्टअप और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने की सराहना, बड़े लक्ष्य निर्धारित करने का आह्वान
Faridabad

आज की खोज खबर (Search Top News)

Top Atulya loktantra News

RSS's Lucknow headquarters was the target of terrorists.
आतंकियों के निशाने पर था RSS का लखनऊ हेडक्वार्टर
22.3k Views
Congress MP says RSS and Al-Qaeda are similar: Khera asked, "Why should we learn from Godse's organization?"
कांग्रेस सांसद बोले- RSS–अलकायदा एक जैसे, खेड़ा ने कहा- गोडसे के संगठन से क्यों सीखें
22.1k Views
Controversy erupts over comedian Kunal Kamra's T-shirt, which features a dog and the RSS-like wording.
कॉमेडियन कुणाल कामरा की टी-शर्ट पर विवाद, कुत्ते के साथ RSS जैसा शब्द लिखा
22.1k Views
Rahul said, "The RSS and BJP are trying to sell the country to a few businessmen."
राहुल बोले-RSS-BJP कुछ बिजनसमैन के हाथों देश बेचना चाह रही
22.1k Views
Bhagwat said, "The RSS has not changed; it is simply revealing its true nature over time."
भागवत बोले- RSS बदला नहीं है, समय के साथ अपने स्वरूप सामने ला रहा
22.1k Views
If someone dies in an attack by stray dogs, the dog feeders are responsible.
आवारा कुत्तों के हमले में मौत तो डॉग फीडर्स जिम्मेदार
22.1k Views
Bhagwat said, "The RSS does not control the BJP: It is wrong to view the Sangh from the party's perspective."
भागवत बोले- भाजपा को RSS कंट्रोल नहीं करता, संघ को पार्टी के नजरिए से देखना गलत
22k Views
Rules to be made for feeding dogs on government campuses
सरकारी कैम्पस में कुत्तों को खाना खिलाने के नियम बनेंगे
19.5k Views
RSS chief Bhagwat said – dependence should not become a compulsion: Pahalgam attack revealed friends and enemies.
RSS प्रमुख भागवत बोले- निर्भरता मजबूरी न बने, पहलगाम हमले से दोस्त-दुश्मनों का पता चला
18.7k Views
Patanjali Dairy Product Cow Milk, Paneer Rate List
10.3k Views

India Top News (इंडिया न्यूज़)

बाल मजदूरी रोकने के लिए सरकार और प्रशासन सजग : एडीसी
8.1k Views
Surajkund craft fair became a cultural gathering due to hospitality of foreign artists
विदेशी कलाकारों की मेहमान नवाजी से सूरजकुंड शिल्प मेला बना सांस्कृतिक समागम
7.2k Views
Four thieves entered the shop by breaking the shutter, stole clothes and cash and escaped
शटर तोड़कर दुकान में घुसे चार चोर, कपड़े और कैश चुराकर हुए फरार
6.9k Views
A 'Prominent Citizens' Seminar' was held at J.C. Bose University to commemorate the centenary year of the RSS.
जे.सी.बोस विश्वविद्यालय में आरएसएस के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में ‘प्रमुख नागरिक संगोष्ठी’ संपन्न
6.6k Views
सूरजकुंड मेले में बढ़ रहा है पर्यटकों का रेला
5.2k Views

लेटेस्ट ब्रेकिंग न्यूज़

Conservation of wetlands is possible only if we stop playing with nature: Gyanendra Rawat
विचार

प्रकृति से खिलवाड़ रुके तभी आद्र भूमि का संरक्षण संभव: ज्ञानेन्द्र रावत

125 Views
2 days ago
The past year holds invaluable memories for me: Gyanendra Rawat
विचार

बीते वर्ष मेरे जीवन की अमूल्य थाती हैं: ज्ञानेन्द्र रावत

118 Views
2 weeks ago
Drinking poison has become the fate of the people of the capital city, Delhi: Gyanendra Rawat
विचार

जहर पीना राजधानी दिल्ली के लोगों की नियति बन गया है: ज्ञानेन्द्र रावत

182 Views
3 weeks ago
जरूरी है थार के रेगिस्तान को रोकने वाली ढाल को बचाना
विचार

जरूरी है थार के रेगिस्तान को रोकने वाली ढाल को बचाना

235 Views
1 month ago
डॉ. हेमलता शर्मा
विचार

संस्कारहीन समाज का निर्माण करता सोशल मीडिया

262 Views
1 month ago
Dr. Richa Yadav has been nominated for the Green Warrior Award.
विचार

डा० रिचा यादव ग्रीन वारियर अवार्ड के लिए नामांकित

237 Views
1 month ago
The Aravalli range will not be saved this way: Gyanendra Rawat
विचार

ऐसे तो नहीं बचेगी अरावली : ज्ञानेन्द्र रावत

416 Views
1 month ago
The journey from desire to experience; when did man first feel a stirring within himself?
विचार

इच्छा से अनुभव तक की यात्रा ; मनुष्य ने कब पहली बार अपने भीतर कुछ हलचल महसूस की !

656 Views
1 month ago

राज्य ताजा खबर

vidyasagar international school
vidyasagar international school

Vichar

The journey from desire to experience; when did man first feel a stirring within himself?
इच्छा से अनुभव तक की यात्रा ; मनुष्य ने कब पहली बार अपने भीतर कुछ हलचल महसूस की !
विचार
What will happen if there are no trees?: Gyanendra Rawat
पेड़ों के न रहने पर क्या होगा ?: ज्ञानेन्द्र रावत
विचार
देश में आज भी समय पर नहीं मिलता न्याय : ज्ञानेन्द्र रावत
देश में आज भी समय पर नहीं मिलता न्याय : ज्ञानेन्द्र रावत
विचार
The Aravalli range will not be saved this way: Gyanendra Rawat
ऐसे तो नहीं बचेगी अरावली : ज्ञानेन्द्र रावत
विचार
The entire Himalayan region is facing an ecological crisis: Gyanendra Rawat
पारिस्थितिकी संकट से जूझ रहा समूचा हिमालयी क्षेत्र: ज्ञानेन्द्र रावत
विचार

National News

Ajit Pawar's wife may become Maharashtra's deputy CM
अजित पवार की पत्नी महाराष्ट्र की डिप्टी–CM बन सकती हैं
6 days ago
Defence budget increased by 15% after Operation Sindoor; no change in income tax
ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा बजट 15% बढ़ा:इनकम टैक्स में बदलाव नहीं
3 days ago
Budget 2026: 50 cities to be designed for international tourists
बजट 2026-अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के​ लिए डिजाइन होंगे 50 शहर
2 days ago
Mumbai flyover reduced from 4-lane to 2-lane: Design mocked on social media
मुंबई में फ्लाई ओवर 4-लेन से 2-लेन हुआ, सोशल मीडिया पर डिजाइन का मजाक बना
7 days ago
Rajasthan: Sadhvi buried in Samadhi after her death under suspicious circumstances
राजस्थान- साध्वी की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद समाधि
5 days ago
Follow US
  • About
  • Contact
  • Advertise With Us
  • Privacy policy
  • Disclaimer
  • Fact-Checking Policy
Play
Play
Play
Twitter Follow
Youtube Subscribe
Welcome Back!

Sign in to your account