चुनाव आयोग ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट में कहा- एक्टर विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल नहीं है। TVK एक मान्यता प्राप्त राज्य पार्टी बनने के लिए जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करती।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की बेंच के सामने ECI के वकील निरंजन राजगोपाल ने कहा- किसी पार्टी को राज्य स्तर पर मान्यता पाने के लिए कम से कम 6% वैध वोट और विधानसभा की दो सीटें या लोकसभा की एक सीट जीतनी जरूरी होती है।
कोर्ट ने ये बातें उन याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कही, जिनमें TVK को रद्द या गैर-मान्यता प्राप्त घोषित करने और करूर रैली घटना के लिए विजय के खिलाफ FIR में अतिरिक्त धाराएं जोड़ने की मांग की गई थी।
दरअसल, 27 सितंबर को तमिलनाडु के करूर में एक्टर विजय की रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। मृतकों में 18 महिलाएं, 13 पुरुष और 10 बच्चे शामिल थे।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता (मदुरै बेंच में वकील) ने कहा कि रैली बहुत भीड़भाड़ वाली जगह पर आयोजित की गई थी। लापरवाही और नियमों के उल्लंघन के कारण यह दुखद घटना हुई। इसमें 40 से ज्यादा मौतें और कई घायल हुए।
इसके अलावा, याचिका में चुनाव आयोग से TVK का पंजीकरण रद्द करने, राजनीतिक रैलियों में बच्चों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने और अभिनेता विजय को पीड़ित परिवारों को प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने का निर्देश देने की मांग की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अक्टूबर को करूर भगदड़ मामले में CBI जांच के आदेश दिए थे। जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने एक्टर विजय की पार्टी TVK और भाजपा नेता उमा आनंदन की मामले की CBI जांच याचिका पर फैसला सुनाया। मद्रास HC ने मामले की जांच SIT को सौंपी थी।
बेंच ने कहा था- सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता वाली 3 सदस्यीय कमेटी जांच की निगरानी करेगी। इसमें दो IPS अधिकारी (तमिलनाडु कैडर के हो, लेकिन यहां के मूल निवास नहीं) इसमें शामिल होंगे, जो IGP रैंक से नीचे के नहीं होने चाहिए।
TVK की ओर से एडवोकेट गोपाल सुब्रमण्यम और सीए सुंदरम ने कहा कि हाईकोर्ट में याचिका केवल राजनीतिक रैलियों के लिए SOP (मानक प्रक्रिया) बनाने को लेकर थी, लेकिन मद्रास हाईकोर्ट ने पहले ही दिन SIT बना दी।
उन्होंने कहा था कि विजय को पुलिस ने सुरक्षा कारणों से स्थल से हटाया था, लेकिन कोर्ट ने इसे ‘घटनास्थल छोड़कर भागने’ जैसा बताया, जो राजनीतिक रूप से गलत धारणा पैदा करता है।
इधर, तमिलनाडु की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि CBI जांच की जरूरत नहीं है, क्योंकि पुलिस की बड़ी चूक साबित नहीं हुई है।
वहीं, मुकुल रोहतगी और पी विल्सन ने कहा- भगदड़ इसलिए हुई क्योंकि भीड़ सुबह से जमा थी, जबकि विजय शाम 7 बजे पहुंचे।


