आईवियर कंपनी लेंसकार्ट के ड्रेस कोड को लेकर विवाद बढ़ गया है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। हिंदू संगठनों से जुड़े लोग 4 दिनों से कई शहरों के लेंसकार्ट स्टोर में जाकर कर्मचारियों को तिलक लगा रहे और कलावा बांध रहे हैं।
इस बीच बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री ने कंपनी के प्रमोटर्स से कहा, ‘तू अपनी कंपनी लाहौर में खोल ले, भारत में काहे को मर रहा है? तेरो कक्का का भारत है क्या? हां! हमारे तो बाप का भारत है।’
पिछले सप्ताह सोशल मीडिया पर कंपनी का एक पॉलिसी डॉक्यूमेंट वायरल हुआ था। इसमें कर्मचारियों को बिंदी, तिलक, कलावा और बुर्का पहनने पर रोक की बात थी। हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई थी।
एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने X पर एक पोस्ट कर की। इसमें उन्होंने लेंसकार्ट का ड्रेस कोड को लेकर डाक्यूमेंट शेयर किया। उन्होंने कंपनी के फाउंडर से पूछा- पीयूष बंसल, क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं कि लेंसकार्ट में हिजाब ठीक है लेकिन बिंदी और कलावा क्यों नहीं? इसके बाद लोगों ने लेंसकार्ट को ट्रोल किया और कंपनी की नीति पर सवाल उठाए।
कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल ने 15 अप्रैल को X पर पोस्ट कर बताया कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है। यह कंपनी की मौजूदा गाइडलाइन नहीं दर्शाता। कंपनी सभी धर्मों का सम्मान करती है। देश में हमारे हजारों टीम मेंबर्स हैं, जो हर दिन अपने विश्वास और संस्कृति को गर्व के साथ अपनाते हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर किए गए ‘ग्रूमिंग गाइड’ के मुताबिक, महिला कर्मचारियों को स्टोर में बिंदी या क्लचर लगाने की अनुमति नहीं है।
इसी डॉक्यूमेंट में बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की मनाही की गई है। अगर कोई कर्मचारी हिजाब या पगड़ी पहनता है, तो वह काले रंग का होना चाहिए। हिजाब की लंबाई ऐसी हो कि कंपनी का लोगो न छुपे।
लेंसकार्ट की शुरुआत साल 2010 में पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही ने की थी। पीयूष बंसल इस कंपनी का मुख्य चेहरा हैं। वे टीवी शो ‘शार्क टैंक इंडिया’ में निवेशक के रूप में नजर आते हैं।
लेंसकार्ट की शुरुआत छोटे स्टार्टअप के तौर पर हुई। आज यह भारत की सबसे बड़ी आईवियर रिटेलर बन चुकी है। भारत में 2500 से ज्यादा स्टोर हैं। मार्केट वैल्यू ₹94 हजार करोड़ है।


