निठारी कांड में 17 साल बाद शुक्रवार को मोनिंदर सिंह पंढेर जेल रिहा हो गया है। नोएडा की लुकसर जेल से वह वकील का हाथ पकड़कर बाहर निकाला। इस दौरान मीडिया कर्मियों ने उससे बात करने को कोशिश की। मगर, उसे कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद हाथ जोड़ते हुए कार में बैठा और निकल गया। इस दौरान जेल के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
इससे पहले शुक्रवार सुबह मोनिंदर पंढेर का परवाना गौतमबुद्धनगर जिला जेल पहुंचा। फिर कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे दोपहर में रिहा कर दिया है। साल 2006 में हुए इस कांड में 16 अक्टूबर को कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मोनिंदर को बरी किया था।
उत्तराखंड की गाड़ी नंबर से निकला पंढेर
अपने वकील के साथ मोनिंदर सिंह पंढेर जिस गाड़ी से गया है। उसका नंबर उत्तराखंड का है। दूसरी तरफ निठारी में D-5 नंबर की पंढेर की कोठी के पास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। हालांकि, कहा जा रहा है कि पंढेर चंढीगढ़ के लिए रवाना हुआ है। यहां उसका बेटा और परिवार के अन्य लोग रहते हैं। फिलहाल, इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकी है।
इसी साल जून में हुई थी शिफ्टिंग
इसी साल जून में पंडेर को गाजियाबाद की डासना जेल से लुक्सर लाया गया था। बीमार होने के चलते उसे आइसोलेशन वार्ड में रखा गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निठारी नरसंहार में सीबीआई कोर्ट से फांसी की सजा पाए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को दोषमुक्त करार दिया था।
कोर्ट ने कुल 14 केस में किया था बरी
नोएडा के निठारी कांड में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर की अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंजूर कर ली थी। गाजियाबाद की CBI कोर्ट ने उन्हें पहले फांसी की सजा सुनाई थी। इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। निठारी मामले में टोटल 14 केस में हाईकोर्ट ने दोषियों को बरी कर दिया था। इसमें कोली को 12 और पंधेर को 2 मामलों में राहत मिली।
हालांकि, कोली को सुप्रीम कोर्ट ने एक केस में फांसी की सजा सुनाई है। जो फिलहाल बरकरार रहेगी। ये फैसला जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्र और जस्टिस एसएचए रिजवी की बेंच ने सुनाया है। लंबी चली बहस के बाद अपीलों पर फैसला सितंबर में सुरक्षित कर लिया गया था।


