लोकसभा में मंगलवार को विपक्ष स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया। 50 से ज्यादा सांसदों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। इसके बाद पीठासीन ने प्रस्ताव पेश करने की परमिशन दे दी। अब इस प्रस्ताव पर 10 घंटे चर्चा होगी। विपक्ष ने ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही में पक्षपात करने का आरोप लगाया है।
बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने कहा कि बजट सत्र के दौरान 20 बार नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को रोका-टोका गया। उन्हें बार बार रूलिंग बुक दिखाई गई।
उन्होंने अपनी स्पीच में एक आर्टिकल का हवाला दिया। इस पर उन्हें मना किया गया, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसदों ने भारत में बैन किताबें सदन में दिखाईं। उनसे कुछ नहीं कहा गया। इस तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं है।
2 फरवरी को नेता विपक्ष राहुल गांधी जब बोल रहे थे, तब उन्हें बार-बार रोका गया। स्पीकर सर ने उनके तर्क पर सबूत देने का कहा।
9 फरवरी को शशि थरूर जब बोल रहे थे, तब उनका माइक बंद कर दिया गया। सरकार ने कहा कि बोलिए, लेकिन हम कैसे बोल सकते हैं जब माइक ऑफ किया गया हो। संसद में ऐसी नई-नई चीजें हो रही हैं।
आज महिला सांसदों के उद्देश्य पर सवाल उठाए जा रहे हैं। ओम बिरला जी ने पीएम मोदी के समय कहा था कि महिला सांसदों ने पीएम की चेयर घेर ली है। उनके साथ कुछ भी हो सकता था। ये बहुत ही शर्मनाक बात है। बिरला ने किस आधार पर महिला सांसदों पर ये आरोप लगाए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि एक ही व्यक्ति है इस देश में जो इन 12 सालों में इनके सामने झुका नहीं। वह नेता प्रतिपक्ष है। और वो नेता प्रतिपक्ष इस सदन में खड़े होके इनके सामने सच बोल देते हैं। सच्चाई वो जो बोलते हैं वह इनसे पचती नहीं है।
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि दिसंबर 2023 में स्पीकर ओम बिरला ने भारतीय पार्लियमेंट के इतिहास का सबसे बड़ा सस्पेंशन दिया, जिसमें विपक्ष के 100 सांसदों को सस्पेंड किया गया था। ये 2004 से हुए सस्पेंशन का 40% था। पिछले 20 साल में इस एक दिन में सदन के 40% सांसद सस्पेंड किए गए थे। ऐसा क्यों किया गया था क्योंकि संसद में घुसपैठ पर विपक्ष सरकार से जबाव मांग रहा था। क्या ये जरूरी मुद्दा नहीं था।


