केंद्र सरकार लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की तैयारी कर रही है। सरकार इसके लिए संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026 लाएगी।
सरकार ने इनसे जुड़े ड्राफ्ट सभी सांसदों को भेजे हैं। इसके मुताबिक, 850 सीटों में से 815 सीटें राज्यों को और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों को दी जाएंगी। इसके लिए 16 अप्रैल से 18 अप्रैल तक संसद का तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया गया है। इसमें महिला आरक्षण बिल पर भी चर्चा होगी।
एक और जरूरी बदलाव जनसंख्या की परिभाषा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है।
इन बदलावों को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है। हालांकि इस पर विरोध भी शुरू हो गया है।
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि सरकार यह सब 2029 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से कर रही है। अगर सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों में ही यह लागू किया जा सकता है। सीटों के पुनर्वितरण से उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी- अगर सीटें अनुपात के आधार पर बढ़ाई गईं, तो दक्षिणी राज्यों में महिलाओं, SC और ST समुदायों को नुकसान हो सकता है। यह कदम दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक ताकत को कम करने की साजिश हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है।
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं।


