किसके साथ जाएगा मेवात का मुसलमान? कांग्रेस ही नहीं बीजेपी भी मेहरबान

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Mewat/Atulya Loktantra : हरियाणा विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करने मेवात के नूंह आ रहे हैं. यह मुस्लिम बहुल इलाका कभी कांग्रेस का मजबूत गढ़ हुआ करता था, लेकिन पिछले चुनाव में पार्टी यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी. ऐसे में बीजेपी की नजर मेवात पर है, इसीलिए यहां से जीते हुए इनेलो के दो विधायकों को मनोहर लाल खट्टर ने अपने खेमे में मिलाकर मैदान में उतारा है. यही वजह है कि कांग्रेस मेवात में खोई हुई अपनी सियासी जमीन को वापस लाने की हरसंभव कोशिश में जुट गई है.

मेवात में मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में
हरियाणा में मुस्लिम मतदाता 7.2 फीसदी हैं, लेकिन मेवात में 70 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी है. मेवात क्षेत्र में पांच विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें नूंह, पुन्हाना, फिरोजपुर झिरका विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है. इसके अलावा सोहना और हथीन सीट पर मुस्लिम वोटर किंगमेकर की भूमिका में हैं.

बता दें कि मेवात इलाके में बीजेपी अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने की कवायद लंबे समय से कर रही है, लेकिन मुस्लिम बहुल इलाका होने के चलते यहां वह पैर नहीं जमा सकी. इसी का नतीजा है कि 2014 के विधानसभा चुनाव में मेवात इलाके की पांच विधानसभा सीटों में से महज एक सीट ही जीत सकी थी. जबकि तीन सीटें इनेलो और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी. वहीं, कांग्रेस अपना खाता नहीं खोल सकी थी. यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस ही नहीं इनेलो और जेजेपी ने भी इस बार मुस्लिमों पर दांव खेला है.

बीजेपी का मुस्लिमों पर दांव
कांग्रेस ने हरियाणा में इस बार कुल 6 मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने फिरोजपुर झिरका से मम्मन खान, पुन्हाना से इलियास खान, नूंह से चौधरी अफताब अहमद, हथीन से इसराइल खान, सोहना से शमसुद्दीन और यमुनानगर से अकरम खान उतरे हैं. वहीं, बीजेपी ने मुस्लिम बहुल मेवात की सियासी जमीन को उपजाऊ बनाने और इस इलाके में कमल खिलाने के लिए दो दिग्गज मुस्लिम नेताओं पर दांव लगाया है. इसमें नूंह से जाकिर हुसैन और फिरोजपुर झिरका से नसीम अहमद को प्रत्याशी बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है.

कांग्रेस भी लुभाने की पूरी कोशिश में
बीजेपी मेवात में जहां कमल खिलाने की कवायद में जुटी है तो कांग्रेस अपने खोए हुए जनाधार को वापस लाने के लिए राहुल गांधी हरियाणा के नूंह से चुनावी शंखनाद कर बड़ा संदेश देना चाहते हैं. कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में भी मेवात के मुद्दों को तवज्जो देकर उन्हें साधने का प्लान बनाया है. इसमें प्रमुख तौर पर मेवात को मेट्रो से जोड़ने, इंजीनियरिंग कालेज, विश्वविद्यालय बनाने का वादा तो मेवात के कोटला झील को पर्यटन के रूप में विकसित करने की बात कही गई है. इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस सरकार आने पर चार डिप्टी सीएम बनाने का दांव चला है.

नूंह विधानसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार चौधरी आफताब अहमद ने बातचीत में कहा कि नूंह जिले में 10 साल में करीब 6000 करोड़ के विकास कार्य कराए थे. कांग्रेस के समय में नूंह को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली थी. इसके अलावा रेल लाइन मंजूर कराने, पीने के पानी से लेकर सिंचाई के पानी की व्यवस्था की गई थी. उन्होंने कहा कि कांग्रेस जब-जब सत्ता में आई है. तब-तब नूंह और पूरे प्रदेश का विकास हुआ है. उसी विकास के दम पर कांग्रेस के शासन को लोग याद कर रहे हैं. यही वजह है कि कांग्रेस को पसंद कर रही है.

बीजेपी ने इसलिए बदली रणनीति
दरअसल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने हरियाणा की सभी 10 लोकसभा सीटें जीतीं, लेकिन जब इसकी विधानसभावार समीक्षा की गई तो पता चला कि बीजेपी 11 सीटों पर कांग्रेस सहित अन्य पार्टियों से पीछे थी. ये 11 सीटें मेवात और जाटलैंड इलाके की थीं. इसी के बाद बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और मुस्लिम विधायकों को अपने साथ मिलाया और उन पर दांव खेला.

किसके साथ जाएंगे मुस्लिम?
बीजेपी इस बार के विधानसभा चुनाव में मेवात क्षेत्र की 5 विधानसभा सीटों को हर हाल में जीतना चाहती है. इसके लिए वह हरसंभव कोशिश कर रही है. इसलिए उसने मुस्लिमों को भी टिकट देकर सबका साथ, सबका विकास का संदेश दिया है. इसके अलावा मेवात में ड्राइवरों के लाइसेंसों के नवीनीकरण की बड़ी समस्या है, जिसे लेकर भी मनोहर लाल खट्टर ने पहल की थी.

दरअसल अनिवार्य योग्यता के नियम की वजह से मेवात क्षेत्र के 20,000 से ज्यादा ड्राइवरों के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पा रहा है. इन ड्राइवरों के लाइसेंसों के नवीनीकरण और नए वाहन चालकों के हित में खट्टर ने इस नियम को हटाने की मांग की थी. ऐसे में अब देखना होगा कि मेवात का मुस्लिम बीजेपी या कांग्रेस किसके साथ जाएगा.

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