तमिलनाडु में सत्तारूढ़ DMK की NRI विंग ने सोशल मीडिया पर भारत का नक्शा शेयर किया, जिसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चिन शामिल नहीं है। विवाद बढ़ने के बाद DMK ने नक्शे को X से हटा लिया है। भाजपा ने DMK पर देश की संप्रभुता के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया है।
भाजपा की तमिलनाडु यूनिट ने X पर लिखा- अलगाववाद को बढ़ावा देने से लेकर उत्तर-दक्षिण विभाजन से अशांति फैलाने और इसरो रॉकेट पर बेशर्मी से चीनी झंडा लगाने तक, हमने DMK की भारत विरोधी गतिविधियों के बारे में सब कुछ देख लिया है।
उधर, DMK प्रवक्ता ने कहा कि ये नक्शा देश की GDP में योगदान को दिखाता है, लेकिन भाजपा अपने खराब शासन को छिपाना चाहती है, इसलिए सिर्फ नक्शा देख रही। DMK ने यह भी आरोप लगाया कि यह नक्शा भारत सरकार ने ही बनाया है।
DMK प्रवक्ता बोले- विवादित नक्शा हमने नहीं, भारत सरकार ने बनाया था
DMK प्रवक्ता TKS एलंगोवन ने विवादित नक्शे के लिए भारत सरकार को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। एलंगोवन बोले- यह तस्वीर राज्यों के देश की GDP में योगदान को दिखाती है। सभी भाजपा शासित राज्यों का हाल बहुत खराब है। तमिलनाडु का योगदान उनसे कहीं बेहतर है। वे परेशान हैं। वे इसे छिपाना चाहते हैं, इसलिए वे डेटा नहीं, बल्कि नक्शा देख रहे हैं। DMK ने वह नक्शा नहीं बनाया, हो सकता है कि उन्होंने किसी जगह से कॉपी किया हो जिसे भारत सरकार ने ही तैयार किया हो।
भाजपा बोली- बिना शर्त माफी मांगें स्टालिन
भाजपा नेता और पार्टी की राज्य समन्वय समिति प्रमुख एच राजा ने तमिलनाडु CM स्टालिन पर कटाक्ष करते हुए कहा- मुख्यमंत्री स्टालिन से, उनकी पार्टी से राष्ट्रीय गौरव की उम्मीद करना बहुत बड़ी बात है। उनकी पार्टी देश के दक्षिण हिस्से को द्रविड़ राष्ट्र के रूप में विभाजित करना चाहती थी। BJP, तमिलनाडु और पूरे भारत के लोगों की तरफ से इस अपमानजनक और शर्मनाक कृत्य के लिए स्टालिन को बिना शर्त माफी मांगनी चाहिए।
तमिलनाडु में राज्यपाल आरएन रवि और CM एमके स्टालिन के बीच एक बार फिर विवाद हो गया है। इस बार मामला तमिलगान से द्रविड़ शब्द हटवाने के आरोप से जुड़ा है। जिसके बाद CM ने PM मोदी से राज्यपाल को हटाए जाने की मांग की है। CM ने उन्हें आर्यन कहा। उन पर देश और तमिलनाडु की एकता का अपमान करने का आरोप भी लगाया।
राज्यपाल आरएन रवि ने CM स्टालिन पर पलटवार करते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण रूप से घटिया हरकत है। इससे मुख्यमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा कम होती है।


