विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी पर गृहमंत्री अमित शाह की टिप्पणी की रिटायर्ड जजों ने आलोचना की है। शाह ने रेड्डी पर नक्सलवाद का समर्थन करने का आरोप लगाया है, जिसे पूर्व जजों ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। कहा कि उपराष्ट्रपति पद का सम्मान करना ही बुद्धिमानी होगी।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के समूह में पूर्व जज जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस जे चेलमेश्वर समेत 18 जज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम फैसला स्पष्ट या परोक्ष रूप से नक्सलवाद या उसकी विचारधारा का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा,
दरअसल, अमित शाह ने 22 अगस्त को केरल में कहा था, ‘सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुदर्शन रेड्डी वही व्यक्ति हैं जिन्होंने नक्सलवाद की मदद की। उन्होंने सलवा जुडूम पर फैसला सुनाया। अगर सलवा जुडूम पर फैसला नहीं आता, तो नक्सली चरमपंथ 2020 तक खत्म हो गया होता।’
जज बोले- फैसले की गलत व्याख्या से न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान
रिटायर्ड जजों के समूह ने बयान जारी कर कहा एक उच्च राजनीतिक पदाधिकारी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले की पूर्वाग्रहपूर्ण गलत व्याख्या से जजों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान पहुंच सकता है।
बयान पर हस्ताक्षर करने वालों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ए के पटनायक, जस्टिस अभय ओका, जस्टिस गोपाल गौड़ा, जस्टिस विक्रमजीत सेन, जस्टिस कुरियन जोसेफ, जस्टिस मदन बी लोकुर, जस्टिस जे चेलमेश्वर, सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े और प्रो. मोहन गोपाल शामिल हैं।
पिछले 4 दिनों में शाह के रेड्डी पर 2 बयान…
बीते चार दिनों में अमित शाह विपक्ष के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी और उनके सलवा जुडूम पर दिए जजमेंट को लेकर 2 बयान दे चुके हैं। 22 अगस्त को केरल के एक कार्यक्रम में शाह ने कहा था,
रेड्डी ने कहा था- फैसला उनका नहीं, सुप्रीम कोर्ट का है
शाह की टिप्पणी पर रेड्डी ने 23 अगस्त को कहा था कि वह गृह मंत्री के साथ मुद्दों पर बहस नहीं करना चाहते। यह फैसला उनका नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट का है। उन्होंने सिर्फ फैसला लिखा था। अगर अमित शाह ने पूरा फैसला पढ़ा होता तो वह यह टिप्पणी नहीं करते।


