लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित न होने को लेकर एनडीए नेता देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं। दिल्ली की CM रेखा गुप्ता ने महिला सांसदों के साथ राहुल गांधी के घर की ओर मार्च किया।
कार्यकार्ताओं ने राहुल का पुतला जलाया। पुलिस ने भीड़ हटाने के लिए वाटर कैनन चलाई। केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज और कमलजीत सहरावत को हिरासत में लिया गया। बाद में छोड़ दिया गया।
उधर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने शनिवार को कहा, ‘कल लोकसभा में जो हुआ वो लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है। सरकार परिसीमन और महिला आरक्षण के जरिए सत्ता में बने रहने की साजिश कर रही थी।’
दरअसल सरकार शुक्रवार को लोकसभा में संविधान का 131वां संशोधन बिल लाई थी। सरकार इसे पास नहीं करा पाई। यह 54 वोट से गिर गया। इसके जरिए संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने कहा- मेरा मन बहुत रो रहा है। कल जब संसद में बिल पास नहीं हो पाया तो आपने PM मोदी का चेहरा देखा होगा कि उन्होंने अपने दर्द और आंसुओं को कैसे काबू में रखा। मेरा तो उठने का भी मन नहीं कर रहा था। कांग्रेस, SP, AAP, TMC, DMK ने इस देश की महिलाओं को चुनौती दी है। महिलाएं उन्हें जवाब देंगी।
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने के विरोध में आंध्र प्रदेश सीएम चंद्रबाबू नायडू ने निदावोलु में प्रदर्शन किया। इसमें टीडीपी, जन सेना और भाजपा दलों के नेताओं व कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने पर, BJP सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कांग्रेस और विपक्षी दल शुरू से ही महिला-विरोधी रहे हैं। 1996 में जब देवेगौड़ा ने यह विधेयक पेश किया था तो उन्होंने इसका विरोध किया था। जब वाजपेयी ने इसे पेश किया तो उन्होंने उसका भी विरोध किया।
असल में इसी विपक्ष के सदस्यों ने तो विधेयक को फाड़ भी दिया था। देश बदल चुका है। राष्ट्र की स्थिति और उसकी दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। वे नहीं चाहते कि इस सदन में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो और न ही वे महिलाओं के सशक्तिकरण की इच्छा रखते हैं। आपकी असली मंशा अब बिल्कुल साफ हो चुकी है।
BJP नेता स्मृति ईरानी ने कहा, मुझे यह सुनकर हैरानी हुई कि आज कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह कहा गया कि वे महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हैं, जो 2023 में पास हुआ था और जिसमें परिसीमन का जिक्र है। लेकिन कांग्रेस के दोहरे रवैये को देखिए, वे यह भी कहते हैं कि उन्हें इस प्रक्रिया के लिए किए गए वादों और इंतजामों पर भरोसा नहीं है। कांग्रेस को देश की संवैधानिक व्यवस्थाओं पर, संसद पर और देश की महिलाओं पर कोई भरोसा नहीं है।


